फॉलो करें

हमारा ऐप डाउनलोड करें

लाखों रुपए खर्च कर कूड़ा निस्तारण करने के मकसद से खरीदी गई  तीन में से दो ट्रोमल मशीनें 5 महीने में एक दिन भी नहीं चली

बिशनपुरा डम्पिंग ग्राउंड में कूड़ा निस्तारण करने के मकसद से  खरीदी गई यह मशीनें 

मशीन के पार्ट्स में लगा जंग और डम्पिंग ग्राउंड में भी कूड़ा जा रहा है बढ़ता

 

जीरकपुर /अखंड लोक (संदीप सिंह बावा)

जीरकपुर।  बिशनपुरा डम्पिंग ग्राउंड में लेगेसी वेस्ट का पहाड़ बना हुआ है और इस समस्या से निपटने के लिए नगर परिषद द्वारा किसी कम्पनी को करोड़ो का ठेका देने की तैयारी की जा रही है। जबकि डम्पिंग ग्राउंड में नगर परिषद द्वारा कूड़े के निस्तारण के लिए लाखों खर्च कर खरीदे गई दो ट्रोमल मशीनें जंग का रही है। हैरानी की बात यह है कि ट्रोमल मशीन ट्रायल के बाद एक दिन भी नहीं चली और नई मशीन खड़े खड़े जंग खा चुकी है। नगर परिषद द्वारा अगस्त 2023 में दो ट्रोमल मशीन खरीदी थी उस वक्त अधिकारियों का दावा था कि दो मशीन लगने से कचरे का निस्तारण दोगुनी रफ्तार से होगा। मशीन के जरिये कचरे से प्लास्टिक सहित गीले कचरे को अलग-अलग करने का दावा किया गया था। लेकिन मशीन पिछले करीब 5 महीने में एक दिन भी नहीं चली। नई ट्रोमल मशीन को चालू कराने का वादा कई बार किया गया, लेकिन इसको लेकर ध्यान नहीं दिया गया। नतीजतन मशीन के पार्ट्स में जंग लग गई है और डम्पिंग ग्राउंड में भी कूड़ा बढ़ता जा रहा है। खानापूर्ति के लिए कूड़े का निस्तारण 5 टन प्रति दिन की क्षमता वाली एक छोटी ट्रोमल मशीन के जरिए किया जा रहा है। जबकि 50 टन प्रति दिन क्षमता वाली दो मशीनें खराब हो रही है। नगर परिषद के अधिकारी दावा कर रहे है कि मशीन चलती है लेकिन मशीन की हालत देखने से ऐसा नहीं लगता।  मशीन की गरारी पूरी तरह जाम है और रोलर भी टूट चुके है।

बिशनपुरा डम्पिंग ग्राउंड में कूड़ा निस्तारण करने के मकसद से यह मशीने खरीदी गई थी। लेकिन करीब 6 महीने से यह मशीन चली ही नहीं।  पिछले कई सालों से यहां कूड़ा आ रहा यही लेकिन कूड़े का निपटान प्रॉपर नहीं हुआ। 4 एकड़ में फैले डम्पिंग ग्राउंड में कूड़े का निपटान न होने के कारण यहां पर 5 से 10 फीट लिगेसी वेस्ट के पहाड़ बन गए हैं।   इसके अलावा अन्य शहर के वार्डों से कूड़ा का उठान भी नहीं हो पाता। एमसी हाउस मीटिंग में सफाई व्यवस्था को लेकर काम करने का एजेंडा सबसे पहले रखा जाता है। शहर में गारबेज की प्रोसेसिंग के लिए नगर परिषद पिछले 15 सालों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं कर सकी है जिससे हर दिन निकलने वाले 50 से 60  टन से ज्यादा कचरे का निपटारा हो सके। शहर की सड़कों के किनारे और खाली प्लॉट्स में कूड़े के ढेर लग गए हैं।

हर रोज 42 से 45 टन कचरा निकलता है शहर से, इसमें सिंगल यूज प्लास्टिक ज्यादा…

शहर में हर रोज 42 से 45 टन से ज्यादा कचरा निकलता है। इसमें सिंगल यूज प्लास्टिक और थर्माकोल आदि भी काफी मात्रा में शामिल होता है। ट्राईसिटी में सब जगह सिंगल यूज प्लास्टिक बैन किया हुआ है, लेकिन जीरकपुर में इसे सिर्फ कागजों में ही बैन दिखाया गया है। सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगानी बहुत जरूरी है। सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो रहा है। रेहड़ी-फड़ियों, दुकानों और मैरिज पैलेसों में तमाम तरह के आयोजनों में सिंगल यूज प्लास्टिक और डिस्पोजेबेल प्लेट्स का यूज होता है। नगर परिषद के अधिकारी दावा तो करते हैं कि उन्होंने इसके लिए कई दुकानदारों के चालान किए हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि अधिकारियों ने इस तरह का अभियान चलाया होता तो सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लग सकती थी। अधिकारियों के दावे के उलट शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल करने और बेचने वालों पर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है। यही कारण है कि शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक का कचरा लगातार बढ़ रहा है।

Akhand Lok News
Author: Akhand Lok News

Share this post:

Leave a Comment

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर

कोरोना अपडेट

Weather Data Source: Wetter Indien 7 tage

राशिफल